iOS - Memory Management

Must follow:
  1. For every alloc, retain, copy you should have a release as soon as you are going to leave it
  2. Avoid using autoreleased objects, You can use autorelease objects but keep in mind that they will not be released until their pool is released
  3. Always respond to memory warnings and take them seriously 
  4. Stick to Lazy Loading, means defer initialization of an object until the point at which it is necessity.
  5. Don't release the objects that we don't own.
  6. Reuse your objects instead of declaring new ones, in possible scenarios.
  7. If you are not using same resource repeatedly then avoid methods like [UIImage imageNamed:@""] because these method will increase cache size, a better alternate is [UIImage imageWithContentsOfFile:@""]
  8. Build custom UITableCell, UICollectionViewCell etc; and reuse them properly
  9. Override setters properly
  10. Use initWithCapacity when size is known to you
  11. Use delegates carefully, remember to set delegate properties to nil before releasing its owner; otherwise, the object might think that its delegate is still there, and will send a message to an invalid pointer.
  12. Use LLVM/Clang Static Analyser tool. It will catch errors regarding the Objective-C naming conventions and hidden memory leaks when using foundation frameworks
Good to have:
  1. Enable Guard Malloc
  2. Enable NSAutoreleaseFreedObjectCheckEnabled
  3. Enable NSZombieEnabled
  4. Enable NSDebugEnabled

गुनाहगारों में आ पहुँचा खतावारों में आ पहुँचा

दयारे ज़ुहुत छोड़ा और मह्ख्वारो में आ पहुंचा
गुनाह ऎ जीस्त की खातिर गुनाहगारों में आ पहुंचा
मेरे दीरा ना हमदम खूब थे पर ये हकीकत है
सबाबित से गुज़र कर आज सैयारों में आ पहुंचा
गुलिस्तानो में रहता था खिज़ा के ज़ोर सहता था
बयाबानो में आ पहुंचा ज़ुनुज़रों में आ पहुंचा
सबिस्तानो के ख़वाब आवर नाज़िर कल की बातें थी
शहर के ज़फिज़ा में बेदार नज़ारों में आ पहुँचा
जो तालिब हैं सुकून ऐ जिंदगी उनको मुबारिक हो
हलाके जूस्तजू था मै की आवारों में आ पहुंचा
नज़र को खीरा कर सकती थी सीमोज़र की ताबानी
नज़र पलती है जिनमे ऐसे नज़रों में आ पहुँचा
मै बेगाना था यज्दा के परिस्तारों की महफ़िल में
ग़नीमत है की इन्सां के परिस्तारों में आ पहुँचा
ऊरूसे ज़िन्दगी की नाज़ परदारी का सौदा था
उरूसे ज़िन्दगी के नाज़ा पर्दारों में आ पहुँचा
अगर यह जिंदगी से प्यार भी एक ज़ुर्म है फ़िर तो
गुनाहगारों में आ पहुँचा खतावारों में आ पहुँचा
भटकता फ़िर रहा था दरबदर और कूबकू  ताबां
यह यारों का तसरुफ़ है की यारों में आ पहुँचा
दयारे ज़ुहुत छोड़ा और मह्ख्वारो में आ पहुंचा
गुनाह ऎ जीस्त की खातिर गुनाहगारों में आ पहुंचा